तुम plans cancel करते हो। और इन्हीं के लिए तुम अपनी पूरी ज़िंदगी भी cancel कर दो।
तुम एक ऐसा विरोधाभास हो जिसके साथ तुम्हारे करीबी दोस्तों ने समझौता कर लिया है। तुम brunch cancel कर देते हो। text का जवाब देना भूल जाते हो। कहा था 7 बजे आऊँगा और बिना किसी ढंग की वजह के 9:15 पर पहुँचे। और फिर भी — जब बात सच में अहम हो, जब मुसीबत असली हो, जब रात के उस वक्त वाला फ़ोन आए — तुम वहाँ होते हो, पूरे, बिना किसी शर्त के। तुम्हारी वफ़ादारी तुम्हारे calendar से कहीं गहरी है। दिक्कत ये है कि हर दोस्त ये फ़र्क पढ़ना नहीं जानता, और कुछ ने तो बुलाना ही पहले से बंद कर दिया है। तुम्हारी नीयत और तुम्हारे निभाने के बीच जो खाई है, उसे खुलकर देखना बनता है।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्तउनके लिए तुम सब कुछ फूँक दो। बस उनका birthday याद नहीं रहेगा। और वो अब सोचने लगे हैं कि इन दोनों में से ज़्यादा कौन-सी बात मायने रखती है।