अच्छे पलों में तुम लाजवाब हो। पर मुश्किल पलों में तुम्हें ढूँढना मुश्किल हो जाता है।
आँख नीयत के नंबर नहीं देती। और उसे जो दिखता है वो ये है: तुम अच्छी चीज़ों के लिए साथ होते हो — जश्न, आसान मुलाक़ातें, वो पल जब सब खुश हों। पर जैसे ही चीज़ें भारी होती हैं, तुम busy हो जाते हो। बात ये नहीं कि तुम बुरे इंसान हो; बात ये है कि सच्ची दोस्ती की एक कीमत होती है जो तुम लगातार चुकाने को तैयार नहीं रहे। तुम्हारे दोस्तों ने ये भांप लिया है, भले कहा न हो। कुछ ने चुपचाप तुम्हें अपनी मुश्किल बातें बतानी बंद कर दी हैं। यही read है। अब इसका क्या करना है — वो तुम्हारे हाथ में है।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्तजश्न में तुम मौजूद रहते हो। पर जब मुसीबत आती है, तुम्हें याद आ जाता है कि कोई और काम भी था।