अगर पैसा महसूस ही न हो, तो उसके होने का फ़ायदा क्या?
तुम्हें उस पैसे का कोई मतलब समझ नहीं आता जिसे तुम महसूस न कर पाओ। सबसे अच्छी seat, वो bottle, वो gift जिसे देखकर किसी की साँस रुक जाए, वो upgrade — यहीं पैसा अपना असली काम कर रहा होता है। तुम्हारे लिए वो याद उस जमा-पूँजी से बढ़कर है, वो रात किसी spreadsheet से बढ़कर। यह तुम्हें magnetic बना देता है; तुम जब pay कर रहे हो तो हर चीज़ बड़ी लगती है। पर यह खर्च भी दरअसल एक एहसास है जिसके पीछे तुम भाग रहे हो, सिर्फ़ कोई चीज़ नहीं जो तुम खरीद रहे हो। उस shopping वाले high की आवाज़ तब सबसे तेज़ होती है जब अंदर कुछ ख़ामोश होता है — जब ‘अपने आप को treat करो’ दरअसल किसी चोट को सहलाने, खुद को साबित करने, या किसी खालीपन को भरने का काम कर रहा होता है। तुम बेपरवाह नहीं हो। तुम बस इस भरोसे में रहते हो कि आगे का आगे देख लेंगे, क्योंकि ‘अभी काफ़ी नहीं है’ के साथ बैठना वो बेचैनी है जिससे बचने के लिए तुम लगभग कुछ भी खर्च कर दोगे।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्ततुम बड़ा खर्च इसलिए करते हो क्योंकि जो पैसा महसूस न हो वो ऐसा लगता है जैसे है ही नहीं। और shopping वाले उस high की आवाज़ तब सबसे तेज़ होती है जब अंदर कुछ