Bill अब भी बंद है। देख लेंगे। शायद। बाद में।
तुम्हारे और पैसे के बीच एक चुपचाप का समझौता है: तुम उसे नहीं देखते, और वो तुम्हारा दिन ख़राब नहीं करता। Bank app बंद पड़ा रहता है, bill दराज़ में पड़ा रहता है, balance एक धुँधला-सा ‘ठीक ही होगा’ बना रहता है। यह आलस नहीं है — यह बचाव है। Numbers ने तुम्हें कभी छोटा, कभी डरा हुआ, कभी पीछे छूटा हुआ महसूस कराया है, तो तुम्हारे मन ने वो एहसास उतरने से पहले ही नज़र फेर लेना सीख लिया। बाहर से तुम वो हल्के-फुल्के वाले हो, वो बेफ़िक्र वाले, वो दोस्त जो पैसे को लेकर कभी माहौल अजीब नहीं बनाता। पर यह न-देखना सुकून नहीं है — यह एक रोकी हुई साँस है। दराज़ में पड़ी वो चीज़ अँधेरे में छोटी नहीं होती — बस तुम्हारे दिमाग के पिछले कोने में मुफ़्त में बसी रहती है, और उसी सुकून की कीमत वसूलती रहती है जिसे तुम बचाने चले थे। राहत कभी टाल देने में थी ही नहीं। वो हमेशा से उसी पल में थी जब तुम आख़िरकार रोशनी जला दो।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्ततुम bill इसलिए नहीं खोलते क्योंकि numbers ने तुम्हें पहले पीछे छूटा हुआ महसूस कराया है, और न-देखना सुरक्षा जैसा लगता है, भले ही यह दरअसल बस एक रोकी हुई