तुम सब कुछ बोलकर समझते हो। Breakup वाली बात कम से कम तीन घंटे चलती है।
तुम बातचीत में यकीन रखते हो। पूरी वाली में। जिसमें तुम बताते हो क्यों, वो बताते हैं क्यों, कोई रोता है, कोई कहता है 'समझ गया', और फिर शायद एक घंटा और चलता है उस सब पर जो सच में अच्छा था। तुम कोई बात बिना खंगाले नहीं छोड़ते। लोग इसे emotional maturity कहते हैं। है भी। पर कभी-कभी ये खत्म हो चुकी बात को थामे रखने का तरीका भी है, उसे खत्म होने देने के बजाय। हर रिश्ते को पूरी debrief नहीं चाहिए होती। पर तुम फिर भी देते हो — क्योंकि अधूरे छूटे वाक्य तुम्हें उस नुकसान से ज़्यादा सताते हैं।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्ततुम्हें पूरी बात इसलिए चाहिए क्योंकि किसी सच्ची चीज़ के बाद की चुप्पी सबसे बुरी बेइज़्ज़ती लगती है — उनकी भी, और जो था उसकी भी।