तुम offline हो जाते हो। अंदर से वाला offline।
जब बोझ हद से ज़्यादा हो जाता है, तुम चुप पड़ जाते हो। किसी नाटक के साथ नहीं — बस रुक जाते हो। plans cancel कर देते हो। एक-एक शब्द में जवाब देते हो। लोगों के साथ एक ही कमरे में बैठे रहते हो और फिर भी पूरी तरह पहुँच से बाहर। तुम जान-बूझकर किसी को दूर नहीं धकेल रहे। बस... इस वक्त मौजूद ही नहीं हो पाते। तुम्हारे अंदर का कुछ जानता है कि इससे निकलने के लिए बिल्कुल थम जाना ज़रूरी है। ये दीवार हमेशा के लिए नहीं है। पर जब तक खड़ी है, कुछ भी इसके पार नहीं जाता — वो बात भी नहीं जो असल में तुम्हें चोट दे रही है। आँख वो ख़ामोशी देखती है। और उसके पीछे जो है, वो भी।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्ततुम चुप हो जाते हो। चीज़ें cancel कर देते हो। थम जाते हो जब तक वो गुज़र न जाए। वो दीवार बेरुख़ी नहीं है। बस यही एक चीज़ है जो तुम्हारे लिए काम करती है।