अगर काफ़ी लोगों की मदद कर दो, तो शायद अपनी परेशानियों के बारे में सोचना ही न पड़े।
जब तुम्हारे लिए चीज़ें मुश्किल होती हैं, तुम अपना रुख़ बाकी सबकी तरफ़ मोड़ देते हो। दोस्तों का हाल पूछते हो। extra shift के लिए खुद आगे आ जाते हो। खुद को सबके लिए बेहद ज़रूरी बना लेते हो। जब बाकी सब हाथ से फिसलता लगे, तब किसी के काम आना एक ऐसी चीज़ है जो तुम्हारे बस में रहती है। ये नकली नहीं है — तुम्हें सच में फ़िक्र है। पर उस फ़िक्र में कुछ ऐसा भी है जो तुम्हें उस मुश्किल सवाल से कतरा जाने देता है कि अभी खुद तुम्हें क्या चाहिए। आँख वो प्यार देखती है जो तुम लुटाते हो। और वो हिस्सा भी, जिसके इर्द-गिर्द से तुम घूमकर निकल जाते हो।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्तमुश्किल वक्त में तुम आसपास सबका ख्याल रखते हो। और जिस सवाल से तुम कतरा रहे हो वो ये है — तुम्हारा ख्याल कौन रखता है।