तुम एक plan बनाते हो। कुछ साफ़ करते हो। कोई system खड़ा करते हो। और इससे राहत मिलती है।
जब कोई चीज़ हाथ से निकलती लगती है, तुम कहीं और control बना लेते हो। कमरा फिर से सजाते हो। spreadsheet बनाते हो। जिस चीज़ का कोई plan नहीं, उसी का plan बना डालते हो। आधी रात को गहरी सफ़ाई में जुट जाते हो। तुम हक़ीक़त से मुँह नहीं मोड़ रहे — बस अपनी बेचैन energy को किसी ऐसी चीज़ की तरफ़ मोड़ रहे हो जिसके किनारे तुम पकड़ सको। तरतीब का वो एहसास तुम्हें संभाले रखता है। और सच कहें? ये अक्सर काम भी करता है। तुम नामुमकिन को बस अपना email inbox ज़ीरो करके झेल जाते हो। आँख तुम्हारे इस system की कद्र करती है। और ये भी देखती है कि ये system किस चीज़ को रोके हुए है।
अपनी रीड पाओ — iPhone पर मुफ़्ततुम plan बनाते हो। कुछ साफ़ करते हो। एक spreadsheet बना लेते हो। अफ़रा-तफ़री तो अब भी वहीं है — बस तुमने खुद को पकड़ने को कुछ दे दिया।