← तुम असल में किससे भाग रहे हो?

⚖️ फैसला

तुम्हें पहले से पता है तुम क्या चाहते हो। बस किसी के इजाज़त देने का इंतज़ार है।

एक फ़ैसला है जिसके साथ तुम बैठे हो। इसलिए नहीं कि जवाब नहीं पता — कहीं अंदर काफ़ी समय से पता है। पर उसे पक्का कर देने का मतलब है एक दरवाज़ा बंद करना। मतलब किसी को निराश करना, या मान लेना कि कुछ काम नहीं कर रहा, या वो इंसान बन जाना जो मुश्किल काम कर डालता है। तो तुम बीच में लटके रहते हो। और जानकारी जुटाते हो। सही वक्त का इंतज़ार करते हो। खुद को कहते हो कि अभी सोच रहे हो। तुम सोच नहीं रहे — टाल रहे हो। आँख देख लेती है कि तुम किसके इर्द-गिर्द घूम रहे हो: वो choice जो दिल ने कब का कर लिया है पर दिमाग बार-बार काट देता है। जवाब वहीं है। हमेशा से था। तुम बस इंतज़ार कर रहे हो कि कायनात इसे आसान बना दे — और वो नहीं बनाएगी।

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खास ताकतें

तुम दुविधा में नहीं हो। हफ़्तों पहले तय कर चुके हो। जिससे तुम भाग रहे हो वो है वो हिस्सा जहाँ इस पर अमल करना होगा।

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